उत्तराखंड

कुंभ शाही स्नान : जानिए कितने साल बाद और कौन लगाएगा गंगा में पहली डुबकी

कुंभ 2021 के सभी स्नान सकुशल संपन्न होने के साथ ही कुंभ का समापन हो गया है। कोरोना महामारी के कारण इस महाकुंभ को हमेशा याद रखा जाएगा। अब अगला कुंभ वर्ष 2033 में होगा और इसका पहला शाही स्नान 28 फरवरी 2033 को महाशिवरात्रि के मौके पर होगा। हालांकि उस समय होने वाले महाकुंभ के स्नानों की तिथियां तभी जारी की जाएगी, लेकिन परंपराओं के अनुसार संन्यासी अखाड़े हरिद्वार में पहला शाही स्नान करते हैं। इस लिहाज से 28 फरवरी को पहला शाही स्नान होगा और सबसे महत्वपूर्ण शाही स्नान 14 अप्रैल को होगा। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार 17-18 मार्च 2033 को कुंभ की शुरुआत होगी।

कुंभ मेला कोरोना काल के कारण हमेशा याद रखा जायेगा। ज्योतिष की दृष्टि से अभी कुंभ समाप्त नहीं हुआ है। परंतु आधिकारिक दृष्टि से मेला समाप्त हो गया है। क्योंकि अब कोई भी स्नान शेष नहीं रहा है। चार शाही और 6 पर्व सभी स्नान संपन्न हो चुके हैं। अब हरिद्वार में कुंभ वर्ष 2033 में होगा। भारतीय प्राच विद्या सोसाइटी कनखल के ज्योतिषाचार्य प्रतीक मिश्र पूरी बताते हंै कि अगले कुंभ की शुरुआत 17-18 मार्च की मध्य रात्रि से होगी। जब देव गुरु बृहस्पति कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। तब से कुंभ मेले का प्रारंभ माना जायेगा। जबकि 14 अप्रैल 2033 से 14 मई 2033 तक ज्योतिष की दृष्टि से कुंभ माना जाएगा।

क्योकि 13-14 अप्रैल की मध्य रात्रि को मेष राशि में सूर्य प्रवेश करेंगे। मुख्य शाही स्नान हरिद्वार में मेष संक्रांति 14 अप्रैल को होगा। जबकि संन्यासियों के लिए महत्वपूर्ण स्नान 28 फरवरी को होगा। माना जा रहा है कि यही हरिद्वार कुंभ का पहला शाही स्नान होगा। जबकि 30 मार्च को चैत्र अमावस्या का मुख्य स्नान होगा। 14 अप्रैल 2033 के दिन संक्रांति और पूर्णिमा दोनों का स्नान साथ होगा। इस दिन संन्यासी एवंं बैरागी दोनों स्नान करेंगे। 31 मार्च को नवसंवत, 8 अप्रैल राम नवमी और अक्षय तृतीया के दिन स्नान होंगे। 2033 में ही अब  हरिद्वार में दुर्लभ संतों के दर्शन होंगे। शाही जुलूस और पेशवाई भी 2033 में दिखेंगे। क्योंकि हरिद्वार के अर्द्धकुंभ में जुलूस और पेशवाई नहीं निकलती है।