उत्तराखंड

कुंभ हरिद्वार 2021:चैत्र पूर्णिमा के शाही स्नान के दिन कोरोना ग्रहण, सीमित संख्या में साधु-संतों ने लगाई गंगा में डुबकी

हरिद्वार में हो रहे कुंभ के आखिरी शाही स्नान के दिन कोरोना का साया साफतोर से दिखाई दिया। चैत्र पूर्णिमा के दिन शाही स्नान के अवसर पर हरकी पैड़ी सहित गंगा घाटों पर साधु, संतों सहित श्रद्धालुओं की भीड़ नहीं देखने को मिली। कम संख्या में हरकी पैड़ी सहित अन्य गंगा घाटों पर श्रद्धालु मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य लाभ प्राप्त किया। श्रद्धालु गंगा स्नान कर घाट पर स्थित मंदिरों में पूजा अर्चना कर पुण्य की कामना मां गंगा और अपने आराध्य देवी देवताओं से किया। साथ ही श्रद्धालु भगवान से कोरोना महामारी के खात्मे की भी प्रार्थना किया, जिससे लोगो का जीवन सुरक्षित, स्वस्थ और सुखमय बन

मेलाधिकारी दीपक रावत ने बताया कि कि शाही स्नान के दौरान उत्तराखंड सरकार की गाइडलाइंस को पूरी तरह ध्यान में रखते हुए कुंभ की सभी परंपराओं का पालन भी किया जा रहा है। अखाड़ों से साधु-संत सीमित संख्या में स्नान के लिए आ रहे हैं। उनके द्वारा वाहन भी सीमित संख्या में प्रयोग किये जा रहे हैं। इसके अलावा स्नान के लिए जो समय सारिणी मेला पुलिस-प्रशासन ने तय की है, उसका पूर्ण रूप से पालन किया जा रहा है।

बता दें कि कुंभ मेले के अंतिम शाही स्नान से पहले अखाड़ा परिषद दो फाड़ हो गई। सोमवार देर शाम को बैरागी अखाड़ों के श्रीमहंतों ने बैठक करके अखाड़ा परिषद से अलग होकर नया अखाड़ा बनाने का ऐलान किया। बैरागी कैंप स्थित दिगंबर अखाड़े में सोमवार को हुई तीनों वैष्णव अखाड़ों के पदाधिकारियों तथा बैरागी संतों की बैठक में सर्वसम्मति से अखिल भारतीय वैष्णव अखाड़ा परिषद के गठन का फैसला किया गया। फैसले की जानकारी देते हुए वैष्णव अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता महंत गौरीशंकर दास ने बताया कि लंबे समय से वैष्णव अखाड़ों की अलग अखाड़ा परिषद के गठन पर विचार किया जा रहा था। अखाड़ा परिषद में तेरह अखाड़े थे। लेकिन वैष्णव अखाड़ों के साथ लगातार भेदभाव किया जा रहा था।