राष्ट्रीय

कोरोना संकट के बीच विदेशों में फंसे भारतीयों को लाने की रणनीति बना रहा है भारत

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को कोविड -19 के खिलाफ लड़ाई, भारत पर इसके प्रभाव और आगे की रणनीति पर विदेश में भारतीय दूतों के साथ विस्तृत बातचीत की। यह जयशंकर का विदेश में शीर्ष भारतीय राजनयिकों के साथ बैठकों का दूसरा दौर है। 20 मार्च को  पहली बातचीत में विदेशों में फंसे भारतीयों पर चर्चा की गई थी। तब उन्होंने भारतीय नागरिकों से आग्रह किया था कि वे स्थिर रहें और घबराएं नहीं।

गुरुवार की इस बातचीत में अगले कुछ हफ्तों में फंसे भारतीयों को घर लाने की सरकार की योजना पर चर्चा हो सकती है। जयशंकर ने एशिया प्रशांत क्षेत्र के दूतों के साथ शुरुआत की है। इसके बाद वे दक्षिण-पूर्व एशियाई देश और फिर दक्षिण एशिया के देशों में राजदूतों से बात करेंगे।

इस बातचीत में केवल जयशंकर नहीं होंगे बल्कि विदेश मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी भी इसमें शामिल होंगे। भारतीय राजनयिक इस बात पर भी ध्यान दे रहे हैं कि दूसरे देशों ने उस वायरस से कैसे निपटा है, जिसने केवल चार महीनों में 225,000 लोगों की जान ले ली है। 3 मिलियन से अधिक को संक्रमित कर कई देशों को लॉकडाउन मोड में डाल दिया है।

भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलो में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। देशभर में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या 33 हजार पार कर गई है। पिछले 12 घंटे में कोरोना वायरस के 1263 नए मामले सामने आए हैं, वहीं 66 लोगों की मौत हो गई है। गुरुवार को जारी स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में कोरोना वायरस के मामले बढ़कर 33050 हो गए हैं और इस खतरनाक कोविड-19 से अब तक 1074 लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना के कुल 33050 केसों में 23651 एक्टिव केस हैं, वहीं 8325 लोगों को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है। कोरोना वायरस से सर्वाधिक 432 लोगों की मौत महाराष्ट्र में हुई। यहां अब इस महामारी से पीड़ितों की संख्या 11940 हो गई है।