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धार्मिक नेताओं की बात में आकर कोरोना को किया अनदेखा, अब भुतहा नजर आ रहा शहर

इस सप्ताह के शुरुआत में मध्य इस्राइली शहर बेनेई बराक की गलियों में अति दकियानूसी लोग खरीदादारी करने में जुटे थे । अपने धार्मिक नेताओं की बातों का पालन करने के दौरान उन्होंने कोरोना वायरस के कारण घरों में रहने की अपील को अनदेखा कर दिया। लेकिन शुक्रवार (3 अप्रैल) आते आते बेरेई बराक दुनिया के सर्वाधिक बुरी तरह प्रभावित इलाकों में बदल गया है। सड़कें सुनसान हैं और शहर भुतहा नजर आ रहा है। एक विशेषज्ञ का कहना है कि शहर की करीब 40 फीसदी आबादी पहले ही संक्रमित हो चुकी है।

शहर में लोगों का गुस्सा चरम पर है। कुछ धर्मनिरपेक्ष इस्राइलियों का आरोप हैकि हारेदी समुदाय ने महामारी को रोकने के देश के प्रयासों को कमजोर किया है। इस समुदाय के लोगों में कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या सबसे ज्यादा है। इस समुदाय में बीमारी के अधिक फैलने के लिए विभिन्न कारक जिम्मेदार हैं। अति दकियानूसी लोग गरीबी, भीड़भाड़ वाले इलाकों में रहते हैं जहां बीमारी तेजी से फैलती है। सिनेगॉग (पूजाघर) में बड़ी संख्या में लोग पूजा करने और समय बिताने के लिए एकत्र होते हैं।

इस्राइली जन सवास्थ्य चिकित्सक संघ के अध्यक्ष और हिब्रू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हेगाई लेविन कहते हैं, ”मुझे बहुत चिंता है कि अति दकियानूसी समाज में यह बीमारी काफी फैलेगी और उसके बाद बड़ी आबादी को चपेट में ले लेगी।” इस्राइल के गठन के दिनों से ही धर्मनिरपेक्ष और अति दकियानूसी इस्राइली एक दूसरे को शक की नजरों से देखते आए हैं। और दोनों के बीच अक्सर मुद्दों को लेकर तनाव पैदा होता रहता है।

बृहस्पतिवार (2 अप्रैल) को स्वास्थ्य मंत्री याकोव लित्ज्मैन के कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद एक नई बहस छिड़ गई। चैनल 12 टीवी ने कहा कि मंत्रालय के अधिकारी लित्ज्मैन से नाराज हैं क्योंकि उन्होंने धार्मिक संस्थानों में लोगों के एकत्र होने पर रोक नहीं लगाई। वह खुद भी अति दकियानूसी समुदाय से आते हैं।

धर्मनिरपेक्ष मारेत्ज पार्टी के पूर्व नेता ज़ेवान गालोन ने हेरात्ज दैनिक में लिखा, ”बेनेई बराक में संक्रमण फैलने का मतलब तेल अवीव में संक्रमण फैलने के बराबर है। लित्ज्मैन ने न केवल अपने मतदाताओं को धोखा दिया है बल्कि सारे इस्राइलियों को धोखा दिया है।”

पिछले महीने जब महामारी को रोकने के लिए इस्राइल ने स्कूलों, आफिसों और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को बंद करना शुरू किया तो इसका विरोध करने वाले लित्ज्मैन अकेले धार्मिक नेता नहीं थे। प्रभावशाली रब्बी चेइम कानिवेस्की नेता ने भी कहा था कि धार्मिक स्थलों को बंद करना वायरस से कहीं अधिक खतरनाक है। लेकिन हालिया दिनों में महामारी के पांव पसारने के बाद 92 वर्षीय कानिवेस्की ने अपने अनुयायियों से घरों में रहने की अपील की है।