उत्तराखंड

उत्तराखंड में मलिन बस्ती नियमितीकरण के लिए दिल्ली मॉडल का अपनाया जाएगा

उत्तराखंड में मलिन बस्तियों को नियमित करने को दिल्ली मॉडल का अध्ययन हो रहा है। वर्ष 2019 में लाए अध्यादेश की समयसीमा खत्म होने में एक साल से कम समय बचा है। ऐसे में विभाग ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है।

अवैध अतिक्रमण पर कोर्ट की सख्ती के चलते मलिन बस्तियों पर आए खतरे को टालने के लिए सरकार जुलाई 2019 में अध्यादेश लाई थी। इसके तहत बस्तियों को तोड़ने से तीन साल तक राहत दी गई थी।

तब सरकार ने तीन साल के अंदर इन बस्तियों को विस्थापित या नियमित करने का संकल्प जाहिर किया था। अब दो वर्ष निकल चुके हैं। अब चूंकि इस काम में एक साल से भी कम समय रह गया है, इसलिए विभाग के स्तर पर मामले में हलचल तेज हो गई है।

शहरी विकास निदेशक की अध्यक्षता में गठित कमेटी पूर्व में इस काम के लिए महाराष्ट्र के ऐक्ट का अध्ययन कर चुकी है। सूत्रों के अनुसार, अब कमेटी प्रमुख तौर पर दिल्ली और साथ ही हरियाणा के ऐक्ट का अध्ययन कर रही है।

दिल्ली में बीते विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सरकार ने बस्तियों को मालिकाना हक दिया था। दोनों राज्यों के ऐक्ट का अध्ययन करने के लिए दो अलग कमेटियों का गठन किया गया है, हालांकि कोविड के कारण कमेटियां अभी दौरा नहीं कर पाई हैं। इधर, देहरादून समेत कुछ निकायों में जमीन सर्वे का काम पूरा हो चुका है।