उत्तराखंड

उत्तराखंड में कोरोना के मिले 158 नए मरीज, अकेले देहरादून में 49 नए केस आए सामने

राज्य में रविवार को कोरोना के 158 नए मरीज मिले। इसमें से सबसे अधिक 49 मरीज देहरादून जिले के हैं। जबकि नैनीताल में 31 मरीज मिले हैं। राज्य में कुल मरीजों की संख्या अब 907 पहुंच गई है। अपर सचिव स्वास्थ्य युगल किशोर पंत ने बताया कि रविवार को लैब से कुल 1221 सैंपल की रिपोर्ट आई जिसमें से 1063 सैंपल की रिपोर्ट नेगेटिव जबकि 158 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इसमें से अधिकांश मरीज प्रवासी हैं। जबकि 22 मरीज कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के परिजन और कर्मचारी हैं।

रविवार को कुल 1588 सैंपल जांच के लिए भेजे गए। जिसमें से 337 नैनीताल, 342 टिहरी गढ़वाल, 281 हरिद्वार जिले से जांच के लिए भेजे गए हैं। रविवार को राज्य के अस्पतालों में कुल एक्टिव मरीजों की संख्या 797 पहुंच गई है। जबकि अभी तक 102 मरीज ठीक होकर घर जा चुके हैं। राज्य में सबसे अधिक 260 मरीज नैनीताल जिले मे हैं। जबकि देहरादून जिले में कुल मरीजों की संख्या 259 पहुंच गई है।

राज्य में तेजी से मरीजों के मिलने के बाद कंटेनमेंट जोन की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है और यह संख्या बढ़कर 36 पहुंच गई है। सबसे अधिक 15 कंटेनमेंट जोन हरिद्वार जिले में हैं। इसके अलावा देहरादून में 13, यूएस नगर में चार, जबकि पौड़ी व टिहरी में दो- दो कंटेनमेंट जोन बनाए गए हैं। बढ़ते मरीजों की वजह से राज्य की संक्रमण दर साढ़े तीन प्रतिशत के करीब पहुंच गया है। जबकि मरीजों के दो गुना होने की दर छह दिन से नीचे आ गई है।

चम्पावत में तीन स्वास्थ्य कर्मी संक्रमित 

हेल्थ बुलेटिन के अनुसार चम्पावत जिले में तीन स्वास्थ्य कर्मी संक्रमित हुए हैं। जबकि एक पुलिस के स्टाफ की रिपोर्ट भी कोरोना पॉजिटिव आई है।

किस जिले में कितने मरीज मिले 

  • देहरादून 49
  • हरिद्वार 17
  • नैनीताल 31
  • टिहरी 3
  • अल्मोड़ा 18
  • चम्पावत 4
  • उत्तरकाशी 7
  • यूएस नगर 20
  • चमोली 2
  • रुद्रप्रयाग 3

छह हजार सैंपल को जांच का इंतजार 

राज्य में सैंपल की संख्या बढ़ने के साथ ही लैब पर भारी दबाव बढ़ गया है। दून, हल्द्वानी, एम्स, श्रीनगर लैब से कुल 6133 मरीजों की जांच रिपोर्ट आना बाकी है। लैब में लगातार बढ़ रही वेटिंग से अस्पतालों में भर्ती संदिग्ध मरीजों और क्वारंटाइन सेंटर में रह रहे प्रवासियों का इंतजार बढ़ रहा है। सबसे अधिक 22 सौ से अधिक सैंपल हरिद्वार जिले के अटके हुए हैं। जबकि अन्य जिलों से भी सैंपल लैब में जांच का इंतजार कर रहे हैं। लैब में वेटिंग बढ़ने से सैंपलिंग की स्पीड बढ़ने का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।