उत्तराखंड

राज्य सहकारी बैंक के अफसरों ने कमीशन के लालच में करोड़ों रुपये शेयर में लुटाए

उत्तराखंड में घाटे का सामना कर रहे सहकारी बैंक के अफसरों ने  बैंक के 31 करोड़ रुपये शेयर बाजार में लुटा दिए। पिछले कुछ समय में जहां लोगों ने शेयर बाजार में निवेश कर खासा मुनाफा कमाया वहीं, सहकारी बैंक ने पैसा डुबो दिया। सहकारी बैंक के अफसरों ने ऐसी कंपनियों में पैसा लगाया, जिनकी मार्केट रेपो बेहतर नहीं थी। नाबार्ड की गाइड लाइन की अनदेखी कर अफसरों ने वर्ष 2019 में दो कंपनियों में 36 करोड़ रुपये का निवेश किया। इसमें 15 करोड़ तो डूब चुके हैं जबकि दूसरी कंपनी से पांच करोड़ रुपये वापस आ गए हैं और 16 करोड़ रुपये अब भी बाजार में अटके हैं। सूत्रों का कहना है कि अफसरों ने कमीशन के लालच में यह पैसा डुबो दिया।

एक कंपनी की शेयर बाजार में अच्छी स्थिति न होने के बावजूद राज्य सहकारी बैंक ने छह फरवरी 2019 को उसमें 15 करोड़ रुपये का निवेश किया। कंपनी पर सेबी की निगरानी और सुप्रीम कोर्ट में चल रहे केस के चलते यह पैसा अटक गया। इसके साथ ही बैंक के अफसरों ने 21 करोड़ रुपये एक अन्य कंपनी में लगाए। यहां भी पैसा डूबने के खतरे को भांपते हुए बैंक ने पांच करोड़ रुपये वापस ले लिए। शेष 16 करोड़ रुपये अब भी फंसे हैं। निवेश को लेकर नाबार्ड के स्पष्ट निर्देश हैं कि सिर्फ केंद्र सरकार के उपक्रमों और मुनाफा देने वाली नवरत्न कंपनियों में ही पैसा लगाया जाए पर सहकारी बैंक के अफसरों ने ऐसा नहीं किया।

बैंक का एक कंपनी में लगा पैसा लगभग डूब चुका है। जबकि दूसरी कंपनी में लगाए 21 करोड़ में से पांच करोड़ रुपये वापस आ गए हैं। हमारा प्रयास है कि शेष 16 करोड़ भी वापस आ जाएं। इन वित्तीय गड़बड़ियों के लिए जो भी लोग दोषी हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।