उत्तराखंड

दून के प्रेमनगर में फिर सजा अतिक्रमण, जिम्मेदारों ने नजरे फेरी

 वर्ष 2018 में जब हाईकोर्ट के आदेश पर दून में अतिक्रमण के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा अभियान चलाया गया तो प्रेमनगर में मशीनरी के कदम ठिठक गए थे। भाजपा और कांग्रेस के नेता ही अतिक्रमण के आगे ढाल बनकर खड़े हो गए थे। हाईकोर्ट का आदेश था तो देर-सबेर अतिक्रमण ढहा दिए गए। हालांकि, चंद माह बाद ही सफेदपोशों की शह और टास्क फोर्स की चुप्पी के बाद अतिक्रमण ने फिर रफ्तार पकड़ ली। लिहाजा, 2019 में भी यहां अतिक्रमण ध्वस्त किए गए।

अब कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए 22 मार्च से लॉकडाउन क्या लागू किया गया कि अतिक्रमणकारियों के हौसले फिर बुलंद हो गए। इस बीच ठाकुरपुर रोड के किनारे 30 से अधिक दुकानें फिर तैयार कर दी गई हैं और अनलॉक शुरू होते ही कइयों में कारोबार भी किया जाने लगा है।

यह स्थिति तब है, जब 20 मार्च को अधिकारी यह मुनादी कर लौटे थे कि दो दिन के भीतर लोग अपने अतिक्रमण स्वयं हटा दें। अन्यथा जेसीबी से सभी अतिक्रमण ध्वस्त कर देगा। यह होश भी अधिकारियों को तब आया, जब क्षेत्रीय निवासी आकाश यादव ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दोबारा अतिक्रमण किए जाने की जानकारी दी।