उत्तराखंड

अतिक्रमण हटाने में किया जा रहा है भेदभाव : उक्रांद

उत्तराखंड क्रांति दल ने आरोप लगाया है कि दून में अतिक्रमण हटाने के नाम पर भेदभाव किया जा रहा है। जिन लोग की कोई पहचान नहीं है, उनके आशियाने उजाड़े जा रहे हैं, जबकि रसूखदारों को रियायत दी जा रही है। यही नहीं, अतिक्रमण हटाओ अभियान की कमान संभालने वाले अधिकारियों ने भी कई जगहों पर खुद अवैध अतिक्रमण करवा रखा है।

अतिक्रमण हटाओ के नाम पर सरकारी तंत्र द्वारा जो दोहरा मानक अपनाया जा रहा है, उसका उक्रांद विरोध करता है। मांग है कि उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार समान मानक अपनाते हुए अतिक्रमण हटाया जाए। बुधवार को केंद्रीय कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में दल के महानगर अध्यक्ष सुनील ध्यानी व शिव प्रसाद सेमवाल ने कहा कि दून में अतिक्रमण एक बड़ी समस्या है। बाहर से आए हुए लोग भी जगह-जगह अतिक्रमण कर रहे हैं।

वहीं भूमाफिया सरकारी जमीनों पर नजर लगाए बैठे हैं। कहा कि उक्रांद के नेता मनमोहन लखेड़ा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने देहरादून से अतिक्रमण हटाने के आदेश शासन-प्रशासन को दिए थे। शासन द्वारा इसके लिए टास्क फोर्स गठित कर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया, लेकिन इस अभियान में जिस तरह के दोहरे मानक अपनाए जा रहे हैं, वह अनुचित हैं।