उत्तराखंड

भगवान शिव को समर्पित केदारनाथ धाम में 15 दिनों में नहीं पहुंचा कोई श्रद्धालु, 29 अप्रैल को खुले थे कपाट

भगवान केदारनाथ धाम के कपाट खुले 15 दिन गुजर गए किंतु इस अवधि में एक भी भक्त केदारधाम नहीं पहुंच सका। यह भी केदारनाथ यात्रा के इतिहास में हमेशा दर्ज रहेगा।

जिस धाम में दर्शनों को एक ही दिन में 30 हजार लोग घंटों लाइन में खड़े रहकर बाबा से आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं वहां भक्तों की आवाजाही ही पूरी तरह बंद है। लोगों को अब उम्मीद है कि लॉकडाउन 4 नए रंग रूप में होगा तो शायद सरकार स्थानीय स्तर पर भक्तों को बाबा केदार के दर्शनों की अनुमति दे दे।

29 अप्रैल को भगवान केदारनाथ धाम के कपाट खोले गए, किंतु वैश्विक महामारी कोरोना ने केदारनाथ यात्रा पर भी विराम लगा दिया। न देश-विदेश के यात्री पहुंचे और न ही स्थानीय लोगों को केदारधाम जाने का अवसर दिया गया।

केदारधाम में भले ही भगवान की नित्य पूजाएं, परम्पराएं और आरती सभी नियमित हो रही है, किंतु कमी खल रही है तो सिर्फ भक्तों की। केदारनाथ धाम में मंदिर के अंदर सुबह, दिन और सांय चारधाम देवस्थानमं बोर्ड से जुड़े 5 लोग ही प्रवेश करते हैं जो कपाट खुलने के पहले दिन से ही प्रवेश करते रहे हैं।

इनमें मुख्य पुजारी शिव शंकर लिंग के साथ 2 वेदपाठी, सेवाकार और सभालिया शामिल हैं। मुख्य पुजारी सुबह 4.30 बजे मंदिर में प्रवेश करते हैं और नित्य पूजा और बाल भोग के साथ विश्व शांति के लिए पाठ कर रहे हैं।

इसके बाद निर्माण दर्शन की प्रक्रिया है किंतु तीर्थयात्री न होने से मंदिर पुन: 5 बजे बंद कर दिया जा रहा है। 11 बजे फिर मंदिर खोलते हुए यहां सफाई की जाती है जबकि जमलोकी ब्राह्मणों द्वारा हवन आदि की प्रक्रिया की जा रही है। मुख्य पुजारी बाबा केदार का श्रृगांर करते हैं और फिर 12 बजे भोग लगाया जाता है।

बाबा केदार की नित्य पूजाएं की जा रही हैं। सुबह 4.30 बजे मंदिर में प्रवेश कर 5 बजे बाल भोग लगाया जाता है जबकि दोपहर 12 बजे भगवान को भोग लगाया जाता है। सांय 6 बजे पूजा अर्चना और 7 बजे भगवान शंकर की भव्य आरती की जाती है। सब कुछ परम्परानुसार किया जा रहा है, किंतु कमी सिर्फ भक्तों की ही महसूस हो रही है।